बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन पूर्णिमा पर उमड़ी भारी भीड़: 2 किमी लंबी कतार में लगे भक्त, कल से फिर शुरू होगी स्पर्श पूजा

देवघर: पवित्र सावन महीने की आखिरी कड़ी यानी सावन पूर्णिमा के अवसर पर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के इस अंतिम और बेहद खास दिन बाबा बैद्यनाथ का आशीर्वाद पाने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का पूरा इलाका ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठा है।

दो किलोमीटर लंबी कतार में लगे श्रद्धालु

सावन पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर शिव भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। बाबा को जल अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं की कतार मंदिर परिसर से काफी दूर तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग दो किलोमीटर लंबी कतार में लगकर भक्त अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

कतारबद्ध होकर जलार्पण करने के लिए शिवभक्त अहले सुबह से ही कड़ाके की धूप और उमस के बावजूद अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन और पुलिस बल की मुस्तैदी

मेले के अंतिम पड़ाव और पूर्णिमा की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है।

  • भीड़ नियंत्रण: रूट लाइनिंग के जरिए भक्तों को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
  • पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं: कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पीने के पानी और ओआरएस के घोल की व्यवस्था की गई है। साथ ही, मेडिकल टीमें भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैनात हैं।
  • सीसीटीवी निगरानी: ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र की पल-पल की गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

कल से फिर शुरू होगी स्पर्श पूजा

सावन मास के दौरान अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों से मंदिर में गर्भगृह के अंदर जाकर स्पर्श पूजा (बाबा के शिवलिंग को छूकर पूजा करना) पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।

प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, सावन मेला के समापन और भीड़ के सामान्य होने के साथ ही कल से भक्तों के लिए पुनः स्पर्श पूजा की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। इस घोषणा के बाद उन श्रद्धालुओं में काफी खुशी है जो इस सावन गर्भगृह में जाकर बाबा का सीधा स्पर्श नहीं कर पाए थे।

सावन के अंतिम दिनों का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा और रक्षा बंधन का दिन बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन जलार्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रावणी मेले के अंतिम पड़ाव पर उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि शिव भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। प्रशासन के सहयोग और स्वयंसेवकों की मेहनत से यह ऐतिहासिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है।

क्या आप इस रिपोर्ट में किसी विशेष स्थानीय समिति या आंकड़ों (जैसे कुल जलार्पण करने वाले भक्तों की संख्या) को जोड़ना चाहते हैं?

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